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शिक्षा मंत्री के साथ शैक्षिक महासंघ की वार्ता, शिक्षकों को राहत

ग्रीष्मावकाश 28 जून तक रहेगा, प्रधानाचार्य अधिकृत अवकाश यथावत

बांसवाड़ा, 25 मई ।
अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ, राजस्थान (ABRSM) विद्यालय शिक्षा द्वारा शिक्षकों के हितों को लेकर चलाए जा रहे प्रान्तव्यापी आंदोलन को एक बड़ी सफलता मिली है। संगठन के 29 मई को प्रस्तावित जिला स्तरीय धरना-प्रदर्शन से पूर्व शुक्रवार देर रात शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने संगठन के शिष्टमंडल को वार्ता के लिए अपने निवास पर आमंत्रित किया और शिक्षक हितों से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा कर शिक्षकों को राहत देने के लिए निर्देश जारी किए। संगठन के जिला अध्यक्ष दिनेश मईडा एवं संभागीय संगठन मंत्री दिलीप पाठक ने बताया कि संगठन के ​प्रदेश अध्यक्ष रमेश पुष्करणा के नेतृत्व में पहुंचे शिष्टमंडल और शिक्षा मंत्री के मध्य, छात्र एवं शिक्षक हित में विभिन्न ज्वलंत मुद्दों पर विस्तृत और सार्थक चर्चा हुई, जिसके बाद संगठन ने अपने प्रस्तावित आगामी आंदोलन के चरणों को स्थगित करने की घोषणा की है। शिक्षक समस्याओं के समाधान के लिए शिक्षा मंत्री मदन दिलावर से हुए इस महत्वपूर्ण संवाद में प्रदेश अध्यक्ष रमेश पुष्करणा के साथ प्रदेश महामंत्री महेन्द्र कुमार लखारा, संघर्ष समिति संयोजक सम्पत सिंह, प्रदेश अतिरिक्त महामंत्री बसन्त जिंदल और प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष रवि आचार्य एवं प्रदेश उपाध्यक्ष अभय सिंह राठौड़ उपस्थित रहे।
प्रदेश महामंत्री महेन्द्र लखारा ने बताया कि वार्ता के मुख्य बिन्दुओं में नया शैक्षणिक सत्र 21 जून के बजाय 29 जून से प्रारंभ करने तथा संस्था प्रधान अधिकृत अवकाश में की गई कटौती को वापस लेते हुए इसे यथावत 2 दिवस रखने पर सैद्धांतिक सहमति बनी। इसके आदेश जल्द ही जारी किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि तृतीय वेतन श्रृंखला के शिक्षकों के स्थानांतरण (तबादलों) के विषय पर शिक्षा मंत्री ने मुख्यमंत्री से विशेष अनुरोध करने का आश्वासन दिया। ​शिक्षकों की पदोन्नति के मामले में माननीय न्यायालय में प्रभावी पैरवी करने के लिए शिक्षा मंत्री ने शिष्टमंडल के सामने ही विभागीय अधिकारियों और अतिरिक्त महाधिवक्ता को दूरभाष पर निर्देश दिए। वहीं क्रमोन्नत विद्यालयों में पदों की वित्तीय स्वीकृति दिलाने और तृतीय श्रेणी शिक्षकों व प्रबोधकों की वेतन विसंगति को दूर करने के लिए वित्त विभाग के स्तर पर व्यक्तिगत प्रयास करने का भरोसा दिया। शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों में अधिकांश संख्या में केवल शिक्षकों को न लगाने के लिए चुनाव आयोग सहित संबंधित विभागों से संवाद कर समाधान निकालने का आश्वासन दिया। संविदा कर्मियों के लिए बने नियमों को लेकर अधिकारियों के साथ पुनर्विचार करने की बात कही।
संघर्ष समिति सयोजक सम्पत सिंह ने कहा कि​ यह शिक्षकों के संघर्ष की जीत है। उन्होंने बताया कि कि शिक्षा मंत्री के साथ हुए संवाद में अधिकांश मांगों पर सैद्धांतिक सहमति बनी है। विभाग के इस सकारात्मक और गंभीर रुख को देखते हुए संगठन ने अपने आगामी आंदोलन के चरणों को स्थगित करने की घोषणा करते हुए कहा कि संघर्ष के कारण ही विभाग को हमारी मांगों पर पुनर्विचार के लिए मजबूर होना पड़ा।
प्रदेश अध्यक्ष रमेश पुष्करणा ने कहा कि संगठन के मांग पत्र में शामिल अन्य प्रशासनिक मुद्दों के निस्तारण के लिए भी शिक्षा मंत्री ने अधिकारियों को तुरंत वार्ता करने के निर्देश जारी कर दिए हैं।

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