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विश्व युवा कौशल दिवस पर विशेष

निरंतरता, अनुशासन और सीखने की भावना से ही वास्तविक सफलता संभव

  • प्रो. (डॉ.) शैलेश सूर्यनारायण अय्यर
    प्राचार्य, एनएसआईटी अहमदाबाद

हमारे देश का भविष्य हमारे युवा, हमारे राष्ट्र की सबसे महत्वपूर्ण संपत्ति है और उनको अपनी प्रतिभा, क्षमता और योग्यता के अनुसार विभिन्न क्षेत्रों में कार्य करने के अवसर मिले, विशिष्ट विषय व क्षेत्र में उनका कौशल विकसित हो इसके मद्देनजर प्रतिवर्ष पंद्रह जुलाई को मनाया जाने वाला राष्ट्रीय कौशल विकास दिवस, जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विश्व युवा कौशल दिवस के रूप में भी मनाया जाता है जो भारत सरकार के कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय द्वारा संचालित स्किल इंडिया मिशन के उद्देश्यों के अनुरूप है। यह दिवस युवाओं को तकनीकी, व्यावसायिक एवं डिजिटल कौशलों से सशक्त बनाने के महत्व को रेखांकित करता है, ताकि वे रोजगार, सम्मानजनक कार्य और उद्यमिता के लिए तैयार हो सकें।
संयुक्त राष्ट्र द्वारा इस वर्ष का विषय साझा भविष्य के लिए कौशल निर्धारित किया गया है। यह विषय ऐसे नवाचारपूर्ण कौशल कार्यक्रमों की आवश्यकता पर बल देता है, जो युवाओं को केवल बदलती परिस्थितियों के अनुरूप ढलने के लिए ही नहीं, बल्कि सहानुभूति के साथ नेतृत्व करने, सांस्कृतिक दूरियों को कम करने, चुनौतियों का सामना करने की क्षमता विकसित करने तथा अधिक समावेशी एवं सतत भविष्य के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित करें।
युवाओं को यह समझना होगा कि “सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता, केवल स्मार्ट वर्क ही सफलता की कुंजी है।” यदि आप तकनीक का सही उपयोग करना जानते हैं, तो वही तकनीक आपके लिए चमत्कार कर सकती है। नई तकनीकों और नए कौशलों को सीखने पर ध्यान दें, अर्जित कौशलों का उपयोग अपने आसपास की समस्याओं के समाधान में करें। प्रभावी संचार कौशल, परिस्थितियों के अनुरूप स्वयं को ढालने की क्षमता तथा निरंतर सीखने की जिज्ञासा आपके उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला बनेगी। जिस क्षेत्र में आप विशेषज्ञता प्राप्त करना चाहते हैं, उसकी ओर प्रतिदिन छोटे-छोटे लेकिन निरंतर कदम बढ़ाते रहें।
जुलाई माह नए तथा वर्तमान विद्यार्थियों के लिए नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत का समय होता है। इस अवसर पर विद्यार्थियों को सफलता और कौशल विकास के लिए कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं पर ध्यान देना आवश्यक है।
उद्देश्य – बदलती तकनीक और बाज़ार की आवश्यकताओं के अनुरूप अपने कौशल विकास की स्पष्ट दिशा तय करें।
योजना- उद्योग की मांग और रोजगार की तैयारी के अनुरूप व्यवस्थित कार्ययोजना बनाएं।
अभ्यास-केवल सैद्धांतिक ज्ञान तक सीमित न रहें, बल्कि नियमित व्यावहारिक और उद्योगोन्मुख प्रशिक्षण प्राप्त करें।
प्रदर्शन -अपने कौशल का प्रदर्शन करें, उसका औपचारिक मूल्यांकन कराएं तथा प्रमाणित करें।
निरंतर प्रगति एवं दृढ़ता आजीवन- सीखते रहें और उद्योग में होने वाले परिवर्तनों के अनुरूप अपने करियर को निरंतर आगे बढ़ाते रहें।
कौशल विकास में युवाओं के सामने आने वाली पाँच प्रमुख बाधाएं है जिनमें डिजिटल मीडिया का अत्यधिक उपयोग, जीवन में स्पष्ट लक्ष्य का अभाव, नशे एवं प्रतिबंधित पदार्थों की लत, अपनी क्षमता से अधिक विलासिता की चाह, अनुशासनहीनता एवं अव्यवस्थित जीवनशैली प्रमुख है।
सफलता केवल शैक्षणिक उपलब्धियों या पेशेवर उपलब्धियों का नाम नहीं है। वास्तविक सफलता का अर्थ है अच्छा शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य, उत्कृष्ट कार्य नैतिकता, मजबूत सामाजिक संबंध तथा सम्मानजनक आय—इन सभी का संतुलित समन्वय ही हमारी सच्ची सफलता है।
विश्वप्रसिद्ध धावक उसैन बोल्ट अक्सर अपनी सफलता के पीछे वर्षों के त्याग और कठिन परिश्रम का उल्लेख करते हुए कहते हैं—”मैंने 9 सेकंड दौड़ने के लिए 4 वर्षों तक कठिन प्रशिक्षण लिया।” वे यह संदेश देते हैं कि दुनिया को दिखाई देने वाली कुछ सेकंड की सफलता के पीछे वर्षों की अनदेखी मेहनत और समर्पण छिपा होता है।
इसी प्रकार उद्यमी एवं प्रेरक वक्ता राज शमानी का एक प्रेरणादायक कथन है “यदि आप हार रहे हैं, तो सिर झुकाकर काम करते रहिए। यदि आप जीत रहे हैं, तब भी सिर झुकाकर काम करते रहिए। यदि लोग आप पर संदेह करते हैं, तब भी सिर झुकाकर मेहनत करते रहिए। एक दिन सब कुछ बदल जाएगा और लोग आपको ‘ओवरनाइट सक्सेस’ कहेंगे।”
अंत में युवाओं के लिए यही संदेश है कि “सिर झुकाकर निरंतर कार्य करते रहिए। सफलता मिलने पर भी उसे अपने सिर पर न चढ़ने दें। निरंतरता, अनुशासन और सीखने की भावना ही आपको वास्तविक सफलता तक पहुँचाएगी।”

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