
आज का दिन- 21 अप्रैल 2026, शिव अवतार आदि शंकराचार्य!
-प्रदीप लक्ष्मीनारायण द्विवेदी (व्हाट्सएप- 8875863494)
* आदि शङ्कराचार्य की जन्म वर्षगाँठ – 21 अप्रैल 2026, मंगलवार
* पञ्चमी तिथि प्रारम्भ – 21 अप्रैल 2026 को 04:14 एएम बजे
* पञ्चमी तिथि समाप्त – 22 अप्रैल 2026 को 01:19 एएम बजे
* आदि गुरु शंकराचार्य का जन्म केरल के कालड़ी गांव में हुआ था.
* वे ब्राह्मण माता-पिता की एकमात्र संतान थे, लेकिन बचपन मे ही उनके पिता का देहांत हो गया.
* उनकी रुचि शुरू से ही संन्यास की ओर थी जिसके कारण कम उम्र मे ही माता से आग्रहपूर्वक सन्यास की अनुमति ली और गुरु की तलाश मे घर छोड़ दिया.
* वेदान्त गुरु गोविन्द पाद से ज्ञान प्राप्त करने के पश्चात संपूर्ण देश का भ्रमण किया.
* उन्होंने देश में व्याप्त धार्मिक कुरीतियों को दूर किया और अद्वैत वेदांत की ज्योति प्रज्वलित कर सनातन धर्म की रक्षा हेतु चारों दिशाओं में चार मठों की स्थापना की.
* वहां शंकराचार्य के पद प्रतिष्ठित करके उस पर अपने चार प्रमुख शिष्यों को पदासीन किया.
* उत्तर मे ज्योतिर्मठ, दक्षिण में श्रृंगेरी, पूर्व में गोवर्धन और पश्चिम में शारदा मठ की स्थापना की.
* केवल 32 वर्ष की अल्पायु में पवित्र केदारनाथ धाम में देह त्याग दी.
* शिव के अवतार शंकराचार्य ससम्मान आदि गुरु कहलाते हैं.
॥ शिवाष्टकम् ॥
तस्मै नमः परमकारणकारणाय
दीप्तोज्ज्वलज्ज्वलितपिङ्गललोचनाय।
नागेन्द्रहारकृतकुण्डलभूषणाय
ब्रह्मेन्द्रविष्णुवरदाय नमः शिवाय॥1॥
श्रीमत्प्रसन्नशशिपन्नगभूषणाय
शैलेन्द्रजावदनचुम्बितलोचनाय।
कैलासमन्दरमहेन्द्रनिकेतनाय
लोकत्रयार्तिहरणाय नमः शिवाय॥2॥
पद्मावदातमणिकुण्डलगोवृषाय
कृष्णागरुप्रचुरचन्दनचर्चिताय।
भस्मानुषक्तविकचोत्पलमल्लिकाय
नीलाब्जकण्ठसदृशाय नमः शिवाय॥3॥
लम्बत्सपिङ्गलजटामुकुटोत्कटाय
दंष्ट्राकरालविकटोत्कटभैरवाय।
व्याघ्राजिनाम्बरधराय मनोहराय
त्रैलोक्यनाथनमिताय नमः शिवाय॥4॥
दक्षप्रजापतिमहामखनाशनाय
क्षिप्रं महात्रिपुरदानवघातनाय।
ब्रह्मोर्जितोर्ध्वगकरोटिनिकृन्तनाय
योगाय योगनमिताय नमः शिवाय॥5॥
संसारसृष्टिघटनापरिवर्तनाय
रक्षः पिशाचगणसिद्धसमाकुलाय।
सिद्धोरगग्रहगणेन्द्रनिषेविताय
शार्दूलचर्मवसनाय नमः शिवाय॥6॥
भस्माङ्गरागकृतरूपमनोहराय
सौम्यावदातवनमाश्रितमाश्रिताय।
गौरीकटाक्षनयनार्धनिरीक्षणाय
गोक्षीरधारधवलाय नमः शिवाय॥7॥
आदित्यसोमवरुणानिलसेविताय
यज्ञाग्निहोत्रवरधूमनिकेतनाय।
ऋक्सामवेदमुनिभिः स्तुतिसंयुताय
गोपाय गोपनमिताय नमः शिवाय॥8॥
शिवाष्टकमिदं पुण्यं यः पठेत् शिवसन्निधौ।
शिवलोकमवाप्नोति शिवेन सह मोदते॥
॥ इति श्री शङ्कराचार्यकृतं शिवाष्टकं सम्पूर्णम् ॥
श्री गौमाता धर्म-कर्म पंचांग, चौघड़िया – 21 अप्रैल 2026
शक सम्वत 1948, विक्रम सम्वत 2083 सिद्धार्थी, अमान्त महीना वैशाख, पूर्णिमान्त महीना वैशाख, वार मंगलवार, पक्ष शुक्ल, तिथि पञ्चमी – 01:19 ए एम (22 अप्रैल 2026) तक, नक्षत्र मृगशिरा – 11:58 पी एम तक, योग शोभन – 12:31 पी एम तक, करण बव – 02:44 पी एम तक, द्वितीय करण बालव – 01:19 ए एम (22 अप्रैल 2026) तक, सूर्य राशि मेष, चन्द्र राशि वृषभ – 01:00 पी एम तक, राहुकाल 03:43 पी एम से 05:20 पी एम, अभिजित मुहूर्त 12:05 पी एम से 12:57 पी एम
राशिफल- 21 अप्रैल 2026
* वृषभ, कर्क, सिंह, वृश्चिक, धनु, मीन राशिवालों के लिए 1:00 पीएम तक उत्तम समय, शेष राशियों के लिए सामान्य दिन, तुला राशि में जन्मे लोगो के लिए अष्टम चन्द्र, सतर्क रहें, शिवोपासना करें!
* दिन का चौघड़िया
रोग – 06:06 से 07:43
उद्वेग – 07:43 से 09:19
चर – 09:19 से 10:55
लाभ – 10:55 से 12:31
अमृत – 12:31 से 02:07
काल – 02:07 से 03:43
शुभ – 03:43 से 05:20
रोग – 05:20 से 06:56
* रात्रि का चौघड़िया
काल – 06:56 से 08:20
लाभ – 08:20 से 09:43
उद्वेग – 09:43 से 11:07
शुभ – 11:07 से 12:31
अमृत – 12:31 से 01:54
चर – 01:54 से 03:18
रोग – 03:18 से 04:42
काल – 04:42 से 06:06
* चौघडिय़ा का उपयोग कोई नया कार्य शुरू करने के लिए शुभ समय देखने के लिए किया जाता है.
* दिन का चौघडिय़ा- अपने शहर में सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.
* रात का चौघडिय़ा- अपने शहर में सूर्यास्त से अगले दिन सूर्योदय के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.
* अमृत, शुभ, लाभ और चर, इन चार चौघडिय़ाओं को अच्छा माना जाता है और शेष तीन चौघडिय़ाओं- रोग, काल और उद्वेग, को उपयुक्त नहीं माना जाता है.
* यहां दी जा रही जानकारियां संदर्भ हेतु हैं, विभिन्न पंचांगों, धर्मग्रथों से साभार ली गई है, स्थानीय समय, परंपराओं और धर्मगुरु-ज्योतिर्विद् के निर्देशानुसार इनका उपयोग कर सकते हैं, क्योंकि यहां दिया जा रहा समय अलग-अलग शहरों में स्थानीय समय के सापेक्ष थोड़ा अलग हो सकता है.
* अपने ज्ञान के प्रदर्शन एवं दूसरे के ज्ञान की परीक्षा में समय व्यर्थ न गंवाएं क्योंकि ज्ञान अनंत है और जीवन का अंत है!
