
ज्ञान, तप और पराक्रम का विशिष्ट संगम -भगवान परशुराम
* निरंजन द्विवेदी
भगवान विष्णु के छठे अवतार माने जाने वाले भगवान परशुराम ज्ञान तप और पराक्रम का विशिष्ट संगम है, वे पृथ्वी पर धर्म की रक्षा और अन्याय के को समाप्त करने के लिए अवतरित हुए थे l भगवान परशुराम भारतीय पौराणिक परंपरा के ऐसे विशिष्ट व्यक्तित्व है जो सत्य का पालन करने, अन्याय के विरुद्ध संघर्ष करने तथा समाज में न्याय स्थापित करने के लिए प्रेरित करते हैं l उनका जीवन धर्म के प्रतिक, तप और साहस के रूप में प्रेरणास्पद है l भगवान परशुराम को चिरंजीवी माना जाता है पौराणिक परंपराओं में यह बताया गया है कि वह आज भी जीवित है और पृथ्वी पर धर्म की रक्षा के लिए हमेशा तत्पर है l उनका व्यक्तित्व व चरित्र सभी को समन्वय के साथ रहने का संदेश देता है l उनके जीवन से प्रेरणा ली जा सकती है कि अन्याय और अधर्म को सहन नहीं किया जाए l भगवान परशुराम ज्ञान और शक्ति का विशिष्ट संयोग रहे हैं जो धर्म के अनुरूप आचरण और कर्म की प्रेरणा देते हैं l भगवान परशुराम का व्यक्तित्व एवं कृतित्व सभी को भेदभाव मुक्त तथा समन्वय के साथ जीवन जीने का संदेश देता है l
भगवान परशुराम का व्यक्तित्व अनुशासित, तेजस्वी और कठिन तप से युक्त था l वह सत्य और धर्म के प्रति निष्ठावान एवं अन्याय और अत्याचार के विरुद्ध तत्पर रहे l उनके व्यक्तित्व में जहां ज्ञान और प्रेमभाव था उसके साथ ही अधर्म के प्रति उनके मन में क्रोध की भावना प्रदर्शित होती थी जो उनके चरित्र को विशिष्ट रूप प्रदान करती थी l
महर्षि जमदग्नि और माता रेणुका के यहां पर जन्मे भगवान परशुराम का मूल नाम राम था लेकिन वह हमेशा फरसा धारण करते थे इसलिए उन्हें परशुराम कहा जाता था l उन्हें हमेशा उन्हें एक महान योद्धा के रूप में जाना जाता है l वह ब्राह्मण और क्षत्रिय गुणों का अद्भुत संगम है l भगवान परशुराम का लक्ष्य पृथ्वी पर अत्याचार और अधर्म का अंत करना था l उपलब्ध पौराणिक तथ्यों के अनुसार उन्होंने अत्याचारी लोगों का संहार किया तथा न्याय व धर्म स्थापना का मार्ग प्रशस्त किया l यह धर्म की पुनर्स्थापना का कार्य माना जाता है l
भगवान परशुराम धर्म एवं कर्म के प्रति समर्पित विशिष्ट व्यक्तित्व रहे हैं l उन्होंने एक गुरु के रूप में विशिष्ट जनों को शिक्षा दी जिनमें भीष्म द्रोणाचार्य और कर्ण जैसे धुरंधर विद्वान शिष्य रहे हैं l उन्होंने पृथ्वी पर गुरु शिष्य की सशक्त परंपरा को भी बनाए रखने की प्रेरणा दी l भगवान परशुराम चिरंजीव है और उनका व्यक्तित्व व चरित्र हमारे लिए प्रेरणा का स्रोत है l उनके जीवन और व्यक्तित्व धर्म के अनुरूप आचरण करने, सत्य के प्रति समर्पण, अन्याय के विरुद्ध तत्पर रहने, समस्त प्राणियों के प्रति कल्याण की भावना रखने तथा समन्वय के साथ जीवन जीने की प्रेरणा देता है l
