बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे विश्वंभर शास्त्री

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राजस्थान में ब्राह्मण समाज के कई ऐसे व्यक्तित्व रहे हैं जिन्होंने अपनी सेवा, समर्पण और त्याग के बलबूते पर सर्व समाज में सम्मान प्राप्त किया और जनहित कार्यों को अंतिम समय तक करते हुए देवलोक गमन किया l प्रदेश की एक ऐसी ही विशिष्ट प्रतिभा रहे हैं वैध विश्वंभर शास्त्री जिन्होंने अपने जीवन काल के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में समाज सेवा करते हुए 11 मई को देवलोक गमन किया l मूलतः झुंझुनू जिले के रहने वाले विशंभर शास्त्री बचपन से ही संघर्षों और कठिन परिश्रम से आगे बढ़े, मात्र 7 वर्ष की आयु में उनके सर से पिता का साया उठ गया और जिम्मेदारियां व अभावों के चलते कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ा लेकिन उन्होंने अपने परिश्रम और मनोबल से परिस्थितियों का सामना करते हुए अच्छी शिक्षा प्राप्त की l एक प्रतिभाशाली विद्यार्थी के रूप में शिक्षा के प्रति उनकी असाधारण समर्पण भावना के चलते उन्होंने अपने अध्ययन को जारी रखा, जन सेवा के लिए उन्होंने वैद्यकिय ज्ञान में पारंगत्ता हासिल की तथा बीएड व एमएड करते हुए शिक्षा को अपना जीवन समर्पित किया l चार विषयों में स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त विशंभर शास्त्री मनोविज्ञान में पीएचडी की उपाधि धारक रहे, उन्होंने शैक्षिक कार्यों में लंबे समय तक सेवाएं दी और प्राचार्य के पद से सेवानिवृत हुए।
एक अनुशासित विद्वान और प्रेरणादाई शिक्षक के रूप में उनकी पहचान अपने शैक्षिक कार्यकाल के दौरान बनी और अपने शैक्षिक दायित्व पूर्ण करने के बाद समाज सेवा और जनहित कार्यों में रुचि लेकर प्रभावी व प्रेरक गतिविधियों का संचालन किया। उन्होंने अपने वैद्यकीय ज्ञान के माध्यम से दो दशक से अधिक समय तक आमजन को स्वास्थ्य चेतना व विभिन्न रोगों के उपचार संबंधी मार्गदर्शन प्रदान किया तथा स्वस्थ बने रहने संबंधी गतिविधियों को लेकर भी वह जागरूकता संचार का कार्य करते रहे। उन्होंने अपने जीवन काल के दौरान अर्जित ज्ञान, संस्कार एवं अनुशासित जीवन की प्रेरणा अपने विद्यार्थियों के साथ ही अपने परिवार जनों को भी दी। उनके दो पुत्र प्रदीप शर्मा एवं मधुसूदन शर्मा तथा दो पुत्रियां आनंदी और रजनी वर्तमान में अपने-अपने क्षेत्र में प्रभावी, सम्मानजनक व सफलतापूर्वक कार्य व जीवनयापन कर रहे हैं। उनके पुत्र मधुसूदन शर्मा अपने पिता की प्रेरणा और सेवाओं के पद चिन्हों पर चलते हुए वर्तमान में ऑल इंडिया ब्राह्मण फेडरेशन के राष्ट्रीय प्रतिनिधि तथा राजस्थान ब्राह्मण महासभा के प्रमुख प्रदेश महामंत्री के रूप में कार्य कर रहे हैं। पंडित मधुसूदन शर्मा अपने पिता से प्राप्त संस्कारो व ज्ञान के अनुरूप समय-समय पर जनसेवा से जुड़ी गतिविधियों व कार्यक्रमों का संचालन कर आमजन को राहत देने के कार्यों में सहभागी बने हुए है।
वैध विशंभर शास्त्री के निधन पर प्रदेश के अग्रणी राजनेताओ, समाजसेवियों एवं सामाजिक संगठनों के लोगों ने शोक व्यक्त करते हुए श्रद्धा सुमन अर्पित किए l
